मेरे उठे कलेजे पीड़ सखी, वृन्दावन जाउंगी।
बाबा मेरे श्याम मैं तुझपे कुर्बान,
जब संत मिलन हो जाए
तेरी वाणी हरी गुण गाए
कई दिनां सूं डिकता या,फागुन की रुत आई जी।
छोटो-सो बिंदायक रग-मग चालै, पांच लाडू खाबा न,
बिन पिए नशा हो जाता है
जो राधे राधे गाता है।
सारे तीर्थ धाम
आपके चरणों में
हे हनुमान प्रणाम
आपके चरणों में
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी
एक तू जो मिला, सारी दुनिया मिली
खिला जो मेरा दिल सारी बगिया खिली।
धन्य वह घर ही है मंदिर,
जहाँ होती है रामायण,
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