सकल हंस में राम बिराजे ,
राम बिना कोई धाम नहीं।
छलकत हमरी गगरिया ये कान्हा छिनी ना मोरी चुनरिया
श्याम तेरी इनायत से,
मिली ये जिंदगानी है,
श्याम धणी की किरपा, जिस पर रहती है,
फुलड़ा परबत में खिल ग्या,
नारायण साढू ने मिल ग्या।।
हरिया हरिया बागा में,
बोल रे सुवटिया,
गोपालो झलके अंखियन में,
नन्दलालो झलके अंखियन में।।
कल्याण मेरे इस जीवन का भगवान न जाने कब होगा
ले चल अपनी नागरिया, अवध बिहारी साँवरियाँ,
नाथ ये वो ही है रघुनाथ,
जिसने मारा है बाली।।
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