दादी थारो रूप मन भायो,जियो हर्सायो
Author: Pushpanjali
के बजरंग बाला ने, पवन के लाला ने कोटी कोटी प्रणाम
सागर से भी गहरा बंदे गुरुदेव का प्यार है
चुनर तो ओढ म्हारी दादी सिंहासन बैठी जी
चुंदड़ी ओढ़ के राखिजे, मैया मन ना दिजे उतार।
तूं छोटी सी बनडी लागे
एकबार आओ जी दादीजी पावना
बाजरे की रोटी खाले श्याम,की चूरमा ने भूल जावेगो
तुम हमारे थे प्रभुजी तुम हमारे हो
आओ आओ सांवरिया बेगा आओ,जीमो जी भोग लगाओ,है छप्पन भोग तैयार जी।
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