अरे कान्हो आयो,चूड़ी बेचन ने धोली दोपरां।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, वासुदेवाय हरी वासुदेवाय।
यह विनती है पल पल क्षण क्षण, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में।
तुम उठो सिया सिंगार करो,शिव धनुष राम ने तोड़ा है।
बापूजी कांई कांई ल्याया साथ, किस विध भरस्यों मायरो।
तूने हीरो सो जनम गवांयो रे, भजन बिना बावरे
कैसी बारात शिव की है आई,ना ही ब्राह्मण है ना कोई नाई।
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अखियां प्यासी रे
सांची बता दे नंदलाला, रूप तेरा क्यों काला।
भिखारी सारी दुनिया, दाता एक राम
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