मेरे कान्हा के लड़ गए नैन राधिका गोरी से,
मोची बनीया महादेव जी,
आवे पार्वता रे देश जी,
चढ़ते सूरज को दुनिया में,
सब करते है यहाँ प्रणाम,
ऐसा क्या काम किया मैंने तेरा
जो मेरा हाथ तूने थाम लिया
कार्तिक के जाते ही मन में चाव चढ़ गया,
सत्संग बिन चैन पड़े कोन्या
दिन कट जाए रात कटे कोन्या
ओम हरी ओम हरी ओम हरी ओम
जब दुःख से मन घबरा जाये
थारा खूब सजे शिंगार म्हारे सांवरिया सरकार,
चली जा रही है उमर धीरे धीरे,
बाबा रो लीलो घोड़लीयो,
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