गंगा बिन तीर्थ,
एकादशी बिना व्रत कहाँ है।
कान्हा मान ले मेरी बात नहीं तो तोहे रंग लगाए दूंगी,
दीवाने है तुम्हारे नाम के हम तो दीवाने है,
ओ यशोदा कन्हैया जबर भयो रे।
माहरी मटकी उलट के पटल गयो रे,
तुने पानी में ज्योत जलाई, तेरी जय हो ज्वाला माई।
किस्मत का मारा हुसँवारे प्यार की थोड़ी सी झलक दिखा मेरे श्याम,
जग पर संकट आया बाबा मोर छड़ी लहराओ ना।
एक रात में दो दो चांद खिले एक सेहरे में एक घुंघट में।
बन ठन के चली गोरा रानी भोले की सुहानी गली में।
खाटू में जबसे आई मिट गए है दुःख सारे,
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