तुम रूठे रहो मोहन हम तुम्हें मना लेंगे
Author: Pushpanjali
एकदींन में चुराकर ले जाऊंगी।रे कान्हा बंसी तेरी रे।
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भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
सखी सपने में अनोखी बात हो गई
तोड़ चलेगा जग से नाता, सदा सदा सो जायेगा
फट गया दूध जमे कैसे, गुरु बिना ज्ञान मिले कैसे।
हे नंदलाल गोपाल तुम्हारी, जग मे जय जयकार
नंद यशोदा की आंख का तारा, बिहारी मेरा रंग रसिया
झूठ बराबर पाप नहीं है रे,सच बराबर तप कोन्या
मेरे सिर पे मटकी दूध की,भोले को नहावन जाऊं रे।
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