मेहंदी ओ मेहंदी, इतना बता तूने,कौन सा काम किया है।
Author: Pushpanjali
Durga suktam, दुर्गा देवी सूक्तम
ये दानेदार माला मेरे किस काम की।
आंखों के आंसु हर पल पुकारे,आजा हारे के सहारे
खाले डट के रे भोग लगाले डट के।
दादी चुनरी मुलायी,तने भाई की ना भाई
सज धज के बैठया दादीजी,यूं बैठ्या बैठ्या मुस्कावे
राधा रानी की नथ पे मोर,नाचे थई थई।
आई सिंह पे सवार मैया ओढ़े चुनरी
डोली चढ़ के दादीजी ससुराल चली
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