थाने मनावां म्हारा सालासर वाला
Author: Pushpanjali
मुझे परवाह नहीं बाबा,जमाना क्या ये बोलेगा।
मुरली वाले ने घेर लेई,अकेली पनिया गई।
करस्यां सिंधारा थारा मावड़ी
सिर पे मां सोहे चुनरिया लाल, हाथों की मेहंदी लगती कमाल।
चढ़ा मेहंदी का रंग,रची लाल सुरंग
दादीजी या विनती म्हारी,सुनियो ध्यान लगाकर जी
बैठी हो मां सामने कर सोलह श्रृंगार
दादी ओढ़ ले टाबरिया थारी चुंदड़ ल्याया ये।
भर लाई रे गगरिया राम रस की
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