दुल्हन बनी रे देखो दुल्हन बनी। कि आज मेरी तुलसा दुल्हन बनी
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा
मेरा अवगुण भरा रे शरीर,
हरी जी कैसे तारोगे
नाचे रे बरसाने की नारियाँ,नाचे दे-दे तालिया,
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे।।
भगवती सामने खुद खड़ी,नाम जपलो घड़ी दो घड़ी
झाडो मोर छड़ी को लगवा ले, हो जासी कल्याण
माखन कितने तेरे चोर , नन्द किशोर, मन मोहन,घनश्याम रे।
मेरा रूठे ना सतगुरु प्यारा, चाहे सारा जग रूठे
जादू भरी तेरी आँखे जिधर गई।
नैनो की कटारी वारी वारि।
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