थोड़ा ध्यान लगा, श्याम दौड़े दौड़े आएंगे
समय के हाथ का कठपुतला है, इस जग में इंसान।
अब कैसे होवे जग में जीवणो म्हारी हेली ,
लागा शब्द रा तीर ।
तेरी जय हो गजानन जी,
कुरमुर कुरमुर पगल्या बाजे,
कौन जिनावर जाय,
ज़ग उजियारा है ये, दिनोँ का सहारा है ये,
कोई पाया ना इसका पार,
तुम दिखते नहीं हो फिर भी हरि,एहसास तुम्हारा होता है,
जब जब भी संकट का मुझ पर घेरा होता है
पीकर प्याला ओम नाम का बन मतवाला रे
कोई जीते कोई हारे।कोई ना समझे प्रभु खेल तुम्हारे,
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