झूलन लागे बनवारी,झूलन लागे।
Author: Pushpanjali
खाटू वाले श्याम बाबा,तेरा ही सहारा
चित्रकूट के घाट, घाट पर,शबरी देखे बाट,राम मेरे आ जाओ।
सजन रे झूठ मत बोलो,खुदा के पास जाना है।
दादीजी का लाड़ मिलकर सारा करांगा
आया सावन बड़ा मनभावन,रिमझिम सी पड़े फुहार
हरियाली तिजां में थारो, रलमिल करस्यां आज सिंधारो
डोर कदम की डार बंधवाये, झूला राधा को श्याम झूलाये
अधरं मधुरं वदनं मधुरं,नयनं मधुरं हसीतं मधुरं
कंचन वाली काया हो,सैलानी म्हें तो पावणा।
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