कमली श्याम दी कमली, नी में कमली श्याम दी कमली
Author: Pushpanjali
मंदिर में उड़े रे ग़ुलाल,
गुलाबी रंग प्यारा लगे
हम तो ठहरे परदेशी,मैया को मनाएंगे
मोहन मुरारी बने मनिहारी,नर से नारी बने नंदलाला
ऐसी होली तोहे खिलाऊँ।
दूध छटी को याद दिलाऊँ,अइयो सावरे।
रंग डारो ना बीच बज़ार,श्याम मैं तो मर जाऊंगी
सेवा पूजा कर नहीं पाया, हुं किस्मत का मारा
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
देखो देखो रे बहार, राजा हिमाचल के द्वार
पत्ते पत्ते में हैं झांकी, भगवान की,
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