काया तेरी रेल बना दूंगी तब तेरो पिछो छोडूंगी
गुमान काहे करती गोरे बदन का। भजन क्यों ना करती राधारमण का।
शिव जी बने हैं दूल्हा,गोरा जी दुल्हनिया
दुर्गा भवानी आई रे, देवी दुर्गा।
चारभुजा रा चौक में ,नाचूली रे घूमर घाल में।
दिल में श्री राम बसे हैं,संग माता जानकी
छगन मगन मेरे लाल को,आजा रे निंदिया आ
बधाई हो बधाई मैं तो ढोलक चिमटा लाई
कभी दुर्गा बनके, कभी काली बनके,
चली आना मैया जी चली आना
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
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