मेरे मोहन तू मुरली बजा दे।नहीं बजती तो मुझको थमा दे।
तेरा रूप बड़ा विकराल कालका डर लागे
भजन करो भरी जवानी में,बुढ़ापा किसने देखा से।
मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।
एकादशी सब व्रतों में बड़ी है
सांची सांची कह दे रे बाबा, कौन लागू मैं तेरी, तू मेरो कौन लागे
यह धोखे श्याम के धोखे, मैंने दिल पे सहे रो रोके, कन्हैया धोखेबाज निकला
मीरा ऐ तेरो बाजै इकतारो, साधा की बाजै ऐ खड़ताल
सजा दो घर को गुलशन सा,मेरे सरकार आये है।
कोई राम का दीवाना तो बनो।
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