धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार
तुम्हारी शरण मिल गई सांवरे,
बाबा मैं तेरे दर का दीवाना
काली काली अलकों के फंदे क्यों डाले,
मैया लाला को समझा ले।जरा यां पे रोक लगा ले,
सखी माता के मेला में, में तो डटगी।
हे मात मेरी, अब दे दो दर्शन करना ना देरी
मुख से क्या वचन निकाला, ओ कैकैयी तूने क्या कर डाला।
अम्बे कहा जाये जगदम्बे कहा जाये,
दीवाने मुझे ले चल खाटू धाम।
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