मेरी बगिया की तुलसी ना तोड़ो माली।
ओ लीलण म्हारी जाओ जी जाओ जी।
जब से तेरी शरण मैं आया है परिवार
गोवर्धन गिरधारी जी, सुध लेना हमारी।
नाम भगवान का जो दिल से लिया करते है।
हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं,
खाटूवाले श्याम तेरा , सच्चा दरबार है
नमामि कृष्णम्,ये कृष्ण प्रेमी कहे निरंतर।
दिन रात जलाए बैठे हैं,आंखों के दिए तेरे खातिर
सज मत श्याम नजर लग जाएगी
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