सुहानी शाम है बन्नी बड़ा रंगीन मौसम है
यह तो बता दो बरसाने वारी,में कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूंगा।
थोड़ा नेडा बसोनी म्हारा राम रसिया।
पधारो शबरी के मेहमान।
दादी झुंझनू बुलाए मेरा मन हरसाएं, मां सबपर प्यार लुटाए,संदेशा आया है
गर जोर मेरो चाले चुनरी उढ़ाऊं तने लाख की।
सावन आयो आओ नंदलाल,
खाटू के बाबा श्याम जी,मेरी रखोगे लाज
जीवन में रंग भर जा,आकर के मेरे श्याम
रमता जोगी आया नगर में आज,रमता जोगी आया।
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