फागुण की रुत ऐसी आई है,
खाटू में मस्ती छाई है,
आया है जन्मदिन,
श्याम धणी सरकार का,
कभी मत घबराना इसके होते हार कहाँ
हट मत पकडे पार्वती,
थाने शिवजी परणवा आवेला,
पीला दे ओ साकी श्याम नाम की मस्ती,
खाटू वाले कर रहे है,
करम चुपके चुपके,
काला पण गणा रुपाला सा सिंगोली रा श्याम ।
ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े
तुझ पे सवार है जो, मेरा सुहाग है
यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,
श्याम-हवेली में मेरे बाबा,
लीले चढ़कर के अइयो,
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