घुंघटियो आड़े आग्योजी, ओ घुंघटियो, आड़े आग्योजी
Author: Pushpanjali
प्यारा सा मुखड़ा घुंघराले केश। कलयुग का राजा खाटू नरेश।
हे मात पिता गुरुवर मेरे, चरणों में शीश नवाता हूं।
आओ गणनायक राजा, अपनी कृपा बरसाओ।
पाय लागूं जी महाराज बीड़द बंका
थारे झांझ नगाड़ा बाजे रे।
सरवरिये के तिर खड़ी या, नानी नीर बहावे है।
जगदंबा थे तो आकर ओढो ए, सेवक ल्याया मां थारी चूंदड़ी।
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना।
जय जय पितर जी महाराज मैं शरण पडयो हूं थारी। ☀️
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