राम जी से पूछे जनकपुर के नारी
Author: Pushpanjali
भक्तों पर कृपा करें , साँवल शाह सरकार
निर्धन रो धन गिरधारी,निर्धन रो धन साचो रे सांवरा
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी
नगरी हो अयोध्या सी,रघुकुल सा घराना हो।
आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,
मुझ को तेरा सहारा सदा चाहिए।
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
नीले पे बेठयो बाबा श्याम, लागे बनडो।
मेहंदी राचण लागी हाथां में, माता के नाम की
एक बार चली आओ,
मेरे द्वार चली आओ
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