फागुण की रुत ऐसी आई है,
खाटू में मस्ती छाई है,
Author: Pushpanjali
आया है जन्मदिन,
श्याम धणी सरकार का,
कभी मत घबराना इसके होते हार कहाँ
हट मत पकडे पार्वती,
थाने शिवजी परणवा आवेला,
पीला दे ओ साकी श्याम नाम की मस्ती,
खाटू वाले कर रहे है,
करम चुपके चुपके,
काला पण गणा रुपाला सा सिंगोली रा श्याम ।
ओ पवन वेग से उड़ने वाले घोड़े
तुझ पे सवार है जो, मेरा सुहाग है
यमुना जल में तुम ऐसे नहाती हो क्यों,
श्याम-हवेली में मेरे बाबा,
लीले चढ़कर के अइयो,
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