काहें तेरी अखियों में पानी,कृष्ण दीवानी मीरा,
अब सुध ले ले मुरलिया वाले, तेरे बिना कोई नहीं रखवाले।
धरती से गगन तक ढूंढा लिया,
मेरा राम न जाने कहां गया।
आनंद छायो जनक नगरिया, कैसे सपरी।
जगत रखवाला हाय डमरू वाला।
भवानी उतरी बाग़ में रे।
हमारे भोले बाबा को, मनालो जिस का दिल चाहे।
ना ज्यादा ना कम, मन्ने इक बार चाहिए,
कन्हैया फिर से आ जाओ, हमारी बाल टोली मे।
हरी भक्तो ने रास रचाया, बूटी घोल घोल के।
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