मोर छड़ी लहराई खाटु के धाम में,
कोई आवे या ना आवे, यो आड़े आसी जी,
खाटू की ये गालियां होंगी मशहूर,
मैं सोचता कुछ और हूं, पर मांगता कुछ और हूं।
सुन श्याम मिजाजी होजा राजी तूं कहनो मान ले।
तेरे रूप के सिवा ना कुछ आये नज़र,
नजरिया मत मारे, मर जाऊंगी रे।
मोहन हमारे मधुबन में तुम आया ना करो,
थारे घट में विराजे भगवान बहार काई ढूंढती फिरे
सांवरा थारी माया रो
पायो कोनी पार।
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