मैं निर्धन तू सेठ संवारा के फायदा इस यारी का,
हम गरीबों के श्याम तुम सहारे रहो,
हम तुम्हारे रहें तुम हमारे रहो ॥
सांवरिया थारा घुंघर वारा रे बाल।
बृजवासी तोहै बुलावे क्यों सांवरिया ना आवे।
राम का नाम भूलाइए मत ना। गुरुजी का मान घटाईए मत ना
गोवर्धन उठाया तो,
कमाल हो गया,
तूने बांसुरी बजाई तो,
धमाल हो गया।।
श्याम सलोना रूप है तेरा,
घुंघराले है बाल,
तुमको दादी चुनरी उढाकर नजर उतारू में
चुनर ओढ़ लो नी गोरा रानी रजवाड़ी, घुंघटा में चमके सोना री बाली।
खाटू के श्याम धणी की,
महिमा अपार है,
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