कभी प्यासे को पानी पिलाया नही, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
Author: Pushpanjali
मानुष तन अनमोल रे,मिट्टी में ना रोल रे
जो तूं मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा
मुझे चरणों से लगाले,मेरे श्याम मुरलीवाले
मने घोड़लियों मंगवाय म्हारी मां
उठ जाग मुसाफिर भोर भई,अब रैन कहां जो सोवत है।
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
भीड़ पड़यां थाने आयां सरसी। यो दुःखडो तो मिटायां सरसी।
नाराणी लियो अवतार, बधाई सारे भक्ता ने।
चारूं पल्ला सुवा मोर मोती लटके।
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