मांगा है मैने श्याम से वरदान एक ही
Author: Pushpanjali
म्हारा प्यारा रे गजानंद आयिज्यो
सांवरे इतना तो कह दे किस से जाकर हम कहें
कान्हा तोहे दही पे नाच नचाय दूंगी,में बरसाने की छोरी।
भीगी पलकों ने श्याम पुकारा है।
देने से पहले क्या कभी, सोचा है सांवरे
मैं दुखिया नीर बहाता, तूं बैठा मौज उड़ाता।
तेरे दर पर आकर मुझे क्या मिला है। यह मैं जानता हूं या तूं जानता है।
नजर में रहते हो मगर तुम नजर नहीं आते
सुनले ओ सांवरिया मुझे तेरा ही सहारा
You must be logged in to post a comment.