राम नाम से तूने बंदे,क्यों अपना मुंह मोड़ा।
Author: Pushpanjali
सावन में झूला झूल रहे,राधे संग कुंज बिहारी।
दिल की हर धड़कन से, तेरा नाम निकलता है।
सावन कृष्ण एकादशी,कामिका एकादशी
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Aarti tulsi ji ki, आरती तुलसी जी की
जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता
होली खेले नंदलाला विरज में,होली खेले नंदलाला।
पलकों का घर तैयार सांवरे
रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा।
मेरो वृंदावन ससुराल,सम्हाल राणा तेरी नगरी,
डमरु वाले बाबा तुमको,आना होगा।
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