काला काला कहवे रे गुजरी,मत काले का जीकर करे
Author: Pushpanjali
बांके बिहारी की देख छटा,देख छटा,मेरो मन है गयो लटा पटा।
ओढ़ चुनरिया लाल,बैठी है दादी सज धज के।
वो तो लाल लंगोटे वाला है,मां अंजनी का लाला है।
राणाजी थारो देसड़लो रंगरूढ़ो
दिल मेरो ले गयो सांवरिया,ओढ के कारी कामरिया।२।
भोला शंकर जी बनकर के जोगी, मां यशोदा के द्वारे खड़े हैं।
चाहे सुख हो चाहे दुःख हो,गणपति मेरे साथ है।
हरी हरी तुलसी मेरी,काला सांवरिया
मुरलिया राधे से बतलाए,
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