बूटी हरी के नाम की,सबको पीलाके पी,
तेरी मर्जी का हूं में गुलाम,बांसुरी वाले श्याम।
बम बम भोला,पहना सन्यासी चोला,
और घोटो भोले नाथ भंगिया और घोटो।
साँवरिया लो संभाल कही ना खो जाऊ
अंबे मां दुर्गे मां अब तो आ जाइए।
नी में अंगना में तुलसी लगाए रखती।
मेरा व्रत ये स्वीकार कर लो, हमपर किरपा बरसा दो,
गं गणपति लंबोदरम,तेरा रूप है अति सुंदरम।
कब आवोगे गुरुजी म्हारे देश,मीरा देखण बाट खड़ी
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