पतित जनों को करो पुनीता, हे राम सीता, हे राम सीता।
हारा वाले बदल तकदीर बे
रूठ गए विष्णु तुलसा बिना
तुलसा मैया लहरिया ले,कन्हैया जी के मन में बसी।
फुलबगिया चलो सखी फूल चुन लावे
किस्मत के खेल निराले रे सांवरिया।
जे सच्चे मन से भजन करोगे तो राम रुखाला हो जागा।
तूं पूजा पाठ करे जा, दुनिया जाली हल जोड़के।
मेरे राम के गीतों को गाकर तो देखो।
कान्हा मोही ऐसो बनइयो मोर,नाचू ता ता थई
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