सारी दुनिया छोड़ के आया तेरे दवार माँ,
पतला दुपट्टा तेरा मुंह दिखे, मुंह दिखे मैया मुंह दिखे।
सिया बनी दूल्हन, दूल्हा रघुराई।
कान्हा ये दुनियां मतलब की दुनियां में अपना कोई नहीं।
अगर देना किशोरी जू
मुझे इतनी दुआए देना।
खुदा ने पूछ लिया
बैकुंठ जाना है
जनक दुलारी की होती बिदाई ।
रोये नगरिया हो
एक दिन मेरे घर आना मेरे बांके बिहारी,
श्याम तेरे नाम के दीवाने हो गए,
दीवाने हो गए मस्ताने हो गए,
लुटा दिया भण्डार खाटू वाले ने,
कर दिया मालामाल खाटू वाले ने,
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