मोटी सेठानी म्हारो बेड़ो पार लगानो पडसी ये
Category: रानीसती दादी भजन लीरिक्स
मैया नवरातों में, जब धरती पर आती है
मेहंदी रची थारे हाथा में,घुल रहयो काजल आंख्यां में
मतवाली मेहंदी ए,दादी जी के हाथा रचगी
चंदन चौक पुरावां, मंगल कलश सजावां।
जगदंबा थे तो आकर ओढो ए, सेवक ल्याया मां थारी चूंदड़ी।
सरब सुहागन मिल मंदीरिए में आई
कर चेत मेरी मैया, क्यूं देर लगावे हैं।
हंसा चाले तो ले चालूं रे झुंझनू नगरी।
मां अबकी हमारी बारी हो
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