सखी री मैं तो बगिया में देख आई राम,
Author: Pushpanjali
पहाड़ों से दौड़ी चली आऊंगी,जरा दिल से पुकारो
बड़ी दूर किनारा है,कश्ती भी पुरानी है।
राधा रानी का अटल सुहाग रहे
बैठ दो घड़ी करले,प्रभु का भजन
बेसहारों का सहारा तेरा दरबार है।
मैया आओ पधारो,हमारे भवन।स्वागतम स्वागतम,आपका आगमन
सखीरी नंदरानी घर,नंद लाला को ब्याह
सियारानी का अचल सुहाग रहे
काजल टीको लगवा ले,लुन राइ करवा ले
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