ओ माली माली माली, चार फूल दे दे।
Author: Pushpanjali
लांगुरिया तेरी एक न मानूंगी भवन में छम छम नाचूंगी।
भोले बाबा न जागे जगाय हारी
मेरे घर आना साँवरिया, तुम्हे जाने न दूँगी।
जिसका साथी खाटू वाला, उसका कौन बिगड़ने वाला
साथी हमारा कौन बनेगा,तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा।
भर दे झोली मेरी झुंझनू वाली।
तेरे दर से ना जाऊँगा खाली,
तेरी मर्ज़ी का में हूँ गुलाम, ओ मेरे अलबेले राम।
घर रह जाओ जनकदुलारी, वहां वन में दुख अति भारी।
ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।
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