थाने पलकां में छिपालयां,थाने हिवड़े से लगालयां,
Category: रानीसती दादी भजन लीरिक्स
कठे सुं ल्याऊँ पांख कठे सुं ल्याऊँ घोड़ी,
चांदी की कटोरी में धुलवाई,मंडवाले दादी में मेहंदी ल्यायी
जबसे देख्यो है थारो श्रृंगार दादी, रानीसती दादी भजन
हर बार तेरे दर पे नवगीत सुनाएंगे
झूलो घाल्यों रे कदम की डार,दादी म्हारी झूल रही।
नाचो गाओ खुशी मनाओ,झुमो रे सब आज,की दादी आई है।
दादीजी का लाड़ मिलकर सारा करांगा
हरियाली तिजां में थारो, रलमिल करस्यां आज सिंधारो
सावन झुमतो आयो रे दादी,हींडो म्हे घलवायों
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