जिंदगी एक किराए का घर है
Author: Pushpanjali
रिद्धि सिद्धि के दाता,सुनो गणपति,
आज बधाइयां बट रही रे नंदरानी के अंगना
बांस की बांसुरिया कान्हो इत्तो इत्तरावे
हरी धुन लागी मुझको मिलने चली श्याम से
मेरे बालाजी महाराज,महाराज,तेरा डंका जग में बाज रहया
कहां खेलन निकल गयो रे,कन्हैयो मेरो छोटो सो
खुल गए सारे ताले, ओय क्या बात हो गई।
चमक्यो चमक्यो सूरज चमक्यो नंद बाबा के आंगने,कान्हो जनम लियो
जन्में हैं कृष्ण कन्हाई, गोकुल में देखो बाजे बधाई
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