गुरुजी मेरे तुम ही पालनहार,
Author: Pushpanjali
प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा।
गर तूं चाहे जो सांवरा, मेरा काम हो जाये
तोहे पूछूं एक सवाल, मैया कारो क्यों तेरो लाल।
तन पर लगा सिंदूरी रंग,छमां छम नाच रहे बजरंग।
बुंटी एक से एक चमक रही, कोन सी ले जाऊं रामजी।
लीले घोड़े वाला बाबा थारो,भालो भलके।
बानर बांको रे,लंका नगरी में मच गयो हाँको रे।
सारे जग में डंका बाजे,हो रहयो थारो नाम
सांवरे की महफिल को, सांवरा सजाता है।
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