भजले प्यारे सांझ सवेरे एक माला श्री राम की
पवन उड़ा के ले गई रे मेरी मां की चुनरिया
भोला भंग तिहारी, नित घोटत घोटत हारी।
शंकर तेरी जटा से बहती है गंग धारा
राम नाम के हीरे मोती में बिखराऊं गली गली।
मेरा श्याम बड़ा अलबेला
यो कुन रंग डारयो।यो कुन रंग डारयो
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
डोरी खींच के राखिजे, यो है बाबा को निशान।
मेरा श्याम रंगीला पलका उघाड़ो फागण आ गयो
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