शिव बम बम भोले भोले,बाघम्बर बिछाए बैठे पिए भंग के गोले
Author: Pushpanjali
राजा दशरथ रे दरवार, बाजा बाज रहया।
म्हारो बेडो लगा दिज्यो पार, ध्यावां थाने बालाजी
नखरालो सांवरीयो राधा पर जादू करग्यो
पगलयांरी पायलडी भीजे हाथा रो चुडलो
चाल गोरी फागनिये में,दोन्युं खाटू चाला ये
जगदम्बे थे तो आकर ओढ़ो ये थारा सेवक ल्याया मां थारी चूंदड़ी
देखो मटकी पे मटकी कन्हैया कईयां
ओढल्यो तारा री मां चुंदड़ी,म्हारी झुंझनू वाली मां हीरा पन्ना जड़योडी।
राधिका गोरी से, विरज की छोरी से
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