श्याम आपा दोन्युं मेला चालां रे
Author: Pushpanjali
चली कांवडीयों की टोली, खाकर भंगिया की गोली
मेरी छोड़ दे माथनीयां नंदलाला
वृंदावन की बादली में बिजली कड़के,
मेरो पलना झूले श्याम किसदिन, घुटवन चालेगो
श्याम जी को नाम एक, उड़न विमान है।
हाय हाय ये बांसुरी तोरी,ये करती जोरा जोरी।
जग जाड़ो चढ़गयो श्याम, भरवादे प्रेम रजाई।
थाली भरकर ल्याई खीचड़ो,ऊपर घी की बाटकी
सरब सुहागन मिल मंदीरिए में आई
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