मेरा भोला है भंडारी,करता नंदी की सवारी भोलेनाथ रे।
Author: Pushpanjali
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
आयो फागण मेलो, बाबो मारे हेलो।
जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी, देख तमाशा लकड़ी का।
राधा रानी तो ऐसी रूठी, झूला झूले न झूलन दे।
लिख दो म्हारे रोम रोम में राम राम हे उमापति
एकदीन मैया पार्वती,भोले से लगी कहने।
sawan ki katha, सावन की कथा
मत सोच मुसाफिर रे,राम करे सो होवे।
बेटा शरवण पानीडो पिलाय,वन में बेटा प्यास लगी।
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