हुई घर घर में जय जयकार हो,आया गणपति का त्योंहार हो।
Author: Pushpanjali
गणपत को लग गई नजरिया,कोई कजरा लगा दो
आना जी गणराज आना,आना आंगन हमारे
गजानन मत जाना मेरा जी ना लगे
तुम सजधज कर के बैठे गजानन,भक्तों की नजर ना लगे
चलो बुलावा आया है,कन्हैया ने बुलाया है।
रंग बरसे नाचे कन्हैया कारो,रंग बरसे।
नंद भवन में उड़ रही धूल,धूल मोहे प्यारी लगे।
मेहंदी ल्याया राचनी सुनल्यों म्हारी मात
व्रज में हो रही जय जयकार,नंद घर लाला जायो है।
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