थारी धोली ध्वजा फरूखे रे। ओ धोरा धरती विराजो म्हारा देव
Author: Pushpanjali
अजमल जी रा कंवरा भूलूं ना एक घड़ी
ब्रह्मा विष्णु भोला बोले, जय गोरा के लाल की।
विपदा आनेवाली थी पर श्याम आ गया
जितनी कमा ले माया, साथ ना जानी
हरी नाम नहीं तो जीना क्या।
कान्हा जन्मे आधी रात,भादौ की रतियां
करो तुम दया मेरे गणराज
यशोदा के नंदकिशोर, हां किशोर मत छेड़ो बीच डगरिया में।
अपनो गांव रखो नंदरानी, हम कहीं और बसेंगी जाय।
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