मैया की लाल चुनरी कैसे बनी।
Author: Pushpanjali
जगदंबे अरज मेरी सुन लीजिए
आओ स्वागत करें अंबे मां का,अंबे डोली चढ़ी आ रही है
हरि सुंदर नंद मुकुंदा हरि नारायण हरि ओम
लाड़ली अद्भुत नज़ारा, तेरे बरसाने में है
माता तेरे भवन में,बाजे घंटों की घनघोर।
पंछीड़ा लाल आछी,
पढ़ियो रे उलटी पाटी,
बजरंगी तुम्हें मनाऊं,सिंदूर चढ़ा चढ़ाके
मन लागा मन लागा,मैया के जगराते में।
सुनो सिया मेरी बात,राम फूल बगिया में आए हैं।
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