उधोजी कर्मन की गति न्यारी ।
ऐसी प्रीत लगी गिरधर से ज्यों सोने में सुहागा रे
कोई कछु कहे मन लाग्या रे।
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Sawariya pyara aajyo medatni re Desh,
सांवरिया प्यारा,मनमोहन प्यारे आज्यो मेड़तणी रे देश।
आवनकी मनभावन की।
कोई कहियो गिरधर आवन की,
गयारस सुनी अवधू
अमावस सुनी रे
एक राधा एक मीरा दोनो ने श्याम को चाहा
अब दिन दया कर, मूझको उबारो
आसा छोड़ दे रे बंदे ,
हाथों हाथ मिले रे पर्चा,
और दुख्ङा सब भूल गई म्हारी हेली, राम रत् धन लाग।
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Aaj jogan ban jaungi,आज जोगन बन जउंगी
आज जोगन बन जउंगी
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