अनहोनी होती नहीं,
तू क्यों हुआ उदास ।
नम: शिवाय नम: शिवाय, नम: शिवाय भजता जा।
अबको जनम तेरो आगलो जनम दोनूं जनम सुधरतो
हँस हँस मिठा जग मे बोलाना ए,
आज सखी ऐ पियो सनमुख पायौ।।
नव दुर्गे माँ के नो रूप निराले है
नर छोड़ दे कपट के जाल, बताऊँ तनै तिरणे की तदबीर ॥
सुन सुन रे म्हारा लोभी रे मनवा हरि को भजन थाने नहीं भावे
बनजा श्याम खेवइया।
झीना झीना घुघरा रुणिचे बाजे जोर रा।
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