थाने काजलियों बना ल्यूं, म्हारे नैना में रमा ल्यूं,श्याम पलकां में बंद कर राखूं जी ।।
मोटे मोटे नैन ऊनके बाल घुंघराले।
कैसे ना इठलाऊं मैं बरसाना मिला है।
आते नहीं दुख के दिन हैं,
पापा हैं तो मुमकिन है,
सांवरा ले ले परीक्षा जितनो जी करे
चाली म्हारी सूरता ये गगन मंडल में ,
रात दिवस ला के माहि रे,
चाल सखी सत्संग में चाला सत्संग म सतगुरु आसी
कानुड़ा थारी लागे छवि प्यारी
बिरज म बाँसुरी बाज़ी ।।
काया रंग चुनड़ी ऐ ,
थारो राम मिलन कैसे होय,,
कलालण एसो प्यालो पाय
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