तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले।
लाली चुनर विच सजके सजन घर, जाना पड़ेगा रे।
तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की।
नौलख तारां बीच चन्द्रमा, म्हारे सतगुरु चंद्रभान।
सुन इकतारे आली,तेरा भूखा मरगया हाली रे
श्याम सवेरे देखूं तुझको कितना सुन्दर रूप है।
शरण में आ गया मैया,ना खाली हाथ जाऊंगा,
हारे मीठा बोलोनी,ओशी उम्र में थोड़ो जीवनो रे,
बजरंगी तुझे मनाऊ सिंदूर लगा लगा के।
आया है कार्तिक मास दीप तुलसा में जलाऊंगी।
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