है संकट मोचन,करते हैं वंदन, तेरे बिना संकट कौन हरे।
Author: Pushpanjali
सतगुरु के चरणों में, बस मेरा ठिकाना है।
रणत भवन से आओ, हे रिद्धि सिद्धि रा दातार
ॐ जय लक्ष्मी रमणा प्रभु श्री लक्ष्मी रमणा
तेरी मेरी करता सारों जनम गवांयो।
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Aarti,mangla gori, मंगला गौरी आरती,
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े
अधर धर मुरली बजैया की, आरती कृष्ण कन्हैया की।
छुपा कहां,आजा छलिया। मुरली वाले आजा तेरी याद सताये
एक अकेला कान्हा, और गोपी कई हजार।
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Aarti,durga ji, दुर्गा जी आरती
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
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